कुरुक्षेत्र ( रणदीप सिंह रोड़) कुरुक्षेत्र की पावन धरती पर श्रील प्रभुपाद का वर्षों पुराना सपना अब साकार रूप ले रहा है। ज्योतिसर में लगभग 6 एकड़ भूमि पर विकसित हो रहा श्रीकृष्ण-अर्जुन मंदिर आने वाले समय में आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और वैदिक ज्ञान का प्रमुख वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस्कॉन कुरुक्षेत्र ने शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में मंदिर निर्माण परियोजना की प्रगति और 19 सितंबर को होने वाले भव्य श्री राधाष्टमी महोत्सव की जानकारी साझा की।
इस्कॉन के संस्थापक आचार्य एवं जगद्गुरु His Divine Grace A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada ने वर्ष 1975 में कुरुक्षेत्र यात्रा के दौरान ज्योतिसर की पवित्र भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण और उनके प्रिय भक्त अर्जुन को समर्पित भव्य मंदिर स्थापित करने तथा भगवद्गीता के संदेश को पूरी दुनिया तक पहुंचाने की इच्छा व्यक्त की थी। 1 दिसंबर 1975 को ज्योतिसर पहुंचकर उन्होंने यहां कृष्ण-अर्जुन मंदिर स्थापित करने की अपनी इच्छा प्रकट की थी।
श्रील प्रभुपाद की इसी इच्छा को आगे बढ़ाने का कार्य उनके वरिष्ठ शिष्य एवं इस्कॉन के GBC रहे परम पूज्य गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज के मार्गदर्शन में आगे बढ़ा। बाद में परियोजना की जिम्मेदारी इस्कॉन कुरुक्षेत्र के अध्यक्ष परम पूज्य साक्षी गोपाल दास जी महाराज ने संभाली। भक्तों, सेवकों और शुभचिंतकों के सहयोग से मंदिर परियोजना को भव्य स्वरूप देने के प्रयास लगातार जारी हैं।
रथ के स्वरूप में बन रहा श्रीकृष्ण-अर्जुन मंदिर
ज्योतिसर में विकसित हो रहे इस मंदिर की वास्तुकला को भगवान श्रीकृष्ण के अर्जुन के सारथी रूप से प्रेरित होकर रथ के स्वरूप में तैयार किया जा रहा है। मंदिर परिसर को केवल पूजा स्थल के रूप में नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शिक्षा, भगवद्गीता अध्ययन, वैदिक ज्ञान और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।
परिसर में विशाल घोड़ों की प्रतिमाएं, गोविंदा रेस्टोरेंट, महाभारत एवं भगवद्गीता से संबंधित संग्रहालय और प्रदर्शनी सहित अनेक आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक आकर्षण विकसित किए जा रहे हैं। परियोजना के तहत विशाल आकार की भगवद्गीता को भी विशेष आकर्षण के रूप में स्थापित करने की योजना है।
मंदिर परियोजना का शिलान्यास वर्ष 2014 में तत्कालीन हरियाणा मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा किया गया था। इसके बाद 29 अगस्त 2015 को तत्कालीन हरियाणा एवं पंजाब के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी की उपस्थिति में मंदिर निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण समारोह आयोजित किया गया और भगवान अनंतदेव की स्थापना की गई।
इस्कॉन के अनुसार, परियोजना पूरी होने के बाद कुरुक्षेत्र आने वाले श्रद्धालुओं, देश-विदेश के पर्यटकों, विद्यार्थियों और आध्यात्मिक जिज्ञासुओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित होगा। मंदिर के पूर्ण होने और उद्घाटन से संबंधित कार्यक्रमों की आधिकारिक जानकारी बाद में साझा की जाएगी।
19 सितंबर को राधाष्टमी का भव्य आयोजन
इसी बीच इस्कॉन कुरुक्षेत्र द्वारा 19 सितंबर 2026 को श्री राधाष्टमी महोत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम मेन बाजार, सीकरी चौक स्थित श्री श्री राधा-राधाकांत मंदिर में आयोजित होगा।
महोत्सव की शुरुआत सुबह 4:30 बजे मंगल आरती के दर्शन से होगी। राधाष्टमी के अवसर पर होने वाले श्री राधारानी के चरणों के विशेष दर्शन श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण रहेंगे। ये दर्शन वर्ष में एक बार विशेष रूप से होते हैं।
इसके बाद सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक विशेष अभिषेक, हरिनाम संकीर्तन, कथा और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। श्रद्धालुओं के लिए भंडारा प्रसाद की भी व्यवस्था रहेगी।
‘श्री राधा कथामृत’ से भक्तिमय हुआ माहौल
राधाष्टमी के उपलक्ष्य में 17 से 19 सितंबर तक तीन दिवसीय ‘श्री राधा कथामृत’ कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा में परम पूज्य गोविंद कृष्ण दास जी श्रीमती राधारानी के तत्त्व, भाव, प्रेम, सेवा-भाव और दिव्य लीलाओं का वर्णन कर रहे हैं।
इस्कॉन कुरुक्षेत्र की ओर से शहरवासियों, श्रद्धालुओं और कृष्ण भक्तों से राधाष्टमी महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आह्वान किया गया है।


